STORYMIRROR

Rajeshwar Mandal

Abstract

4  

Rajeshwar Mandal

Abstract

मैं

मैं

1 min
233

मैं कल तक जो मैं था आज भी वही मैं हूं

पर मैं कल जो मैं था आज वो मैं नहीं हूं

फर्क कुछ भी नहीं है दोनों मैं में


पर फर्क बहूत है दोनों मैं में

एक मैं ठहाके की हंसी हंसता था

और एक मैं मधुर मुस्कान बिखेरता है


फूरसत के पलों में दोस्त यार पुछते है

दोनों मैं का अंतर

दोनों मैं के बीच के फासले का कारण

पर उन्हें कैसे समझाऊं 


मैं अपने अंतर्मन की पीड़ा

ठहाके से मधुर मुस्कान का सफर

एक उन्मुक्त हंसी था और एक बोझिल हंसी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract