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मैं तुझसे प्यार नहीं करता

मैं तुझसे प्यार नहीं करता

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मैं तुझसे प्यार नहीं करता

अपनी सांसों से उलझी

तेरी सांसों को मगर इनकार नहीं करता।


मैं तुझसे प्यार नहीं करता

महफ़िलों में हर शाम तन्हा गुजार देता हूँ

तू ना हो आस-पास तो मैं खुद को

शराब में डूबा पाता हूँ।


.....मगर.......

मैं तुझसे प्यार नहीं करता

आज भी उन फ़ैली किताबों में

तेरे हाथों के स्पर्श को महसूस करता हूँ।


तेरी उन गलियों में आवारों सा घुमा करता हूँ

तेरे कदमों के निशां पे खुद के

कदमों को रखा करता हूँ।


....मगर सच कहता हूँ....

मैं तुझसे प्यार नहीं करता

मैं तुझसे प्यार नहीं करता।।


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