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Ajay Singla

Inspirational

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Ajay Singla

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मैं कौन हूँ ….

मैं कौन हूँ ….

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मैं कौन हूँ 


प्रश्न उठा कि “ मैं कौन हूँ “

मैं से ही इसका उत्तर आया 

“परब्रह्म आत्मा मैं तो “

दूजा मैं इससे भरमाया ।


जो मैं हूँ परब्रह्म आत्मा 

तो रिश्ते नाते संसार के 

और पद, प्रतिष्ठा मेरी 

ये सब क्या सारे हैं झूठे ।


मैं ही प्रश्न करे है मैं से 

एक प्रश्न करे, उत्तर दे दूजा 

कहे आत्मा को ना मानो तुम 

करते बस शरीर की पूजा ।


परंतु ऐसा करते हुए भी 

मुझे लगे कि तुम प्रेम करो 

जाने अनजाने में समझ लो 

उस शरीर के अंदर आत्मा को ।


ऐसा नहीं होता अगर तो 

वो शरीर से निकल जब जाए 

शरीर तो अब भी पड़ा वहाँपर 

उस को कोई रख ना पाए ।


फिर से वही प्रश्न उठ रहा 

मैं शरीर या आत्मा मैं 

और मानलो मैं आत्मा हूँ 

भिन्न भिन्न क्या ये सबमें है ।


मैं मैं से फिर प्रश्न कर रहा 

और जो आत्मा एक है सबकी 

तो प्रेम या द्वेष करे जो 

ये आत्मा किससे करती ।


क्या ये प्रश्न इतना जटिल है 

या सरल, पर समझ ना आए 

हे प्रभु, ज्ञान दो मुझको 

आपकी माया मुझे भरमाए ।


पार पाना इससे कठिन है 

पर जो तुम्हारी कृपा हो 

मैं कौन हूँ, इस प्रश्न का 

उत्तर समझें हम अज्ञानी जो ।


अजय सिंगला


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