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Sunita Shukla

Inspirational

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Sunita Shukla

Inspirational

मैं हूँ तेरी परछाई माँ...!!

मैं हूँ तेरी परछाई माँ...!!

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माँ....

मैं तुझपे क्या लिखूँ...

तूने तो खुद मुझे लिखा है।

तुझमें सिमटी दुनिया मेरी....

मैं अक्स हूँ तेरी इबादत का।।

तुम निश्छल ममता की छाँव भरी अमराई माँ।

मैं तो हूँ बस तेरी इक परछाई माँ....!!!


कल तक कोई भान न था

जिम्मेदारी का ज्ञान न था।

तेरे आँचल में महफ़ूज थे हम

गमों से सारे दूर थे हम।।


बनी हूँ जब से खुद मैं माँ

समझ में आया हर त्याग तेरा।

तेरी हर इक सीख ने माँ

सुखमय कर दिया है जीवन मेरा।।


हमने तो थोड़ी खुशियाँ चाही थी

माँ का करम तो देखो

ईश्वर की वह करे इबादत

माँ जैसी ही चाची पाई जिसने,

ईंटों की इस चारदीवारी को प्यार से तुमने सींचा

और एक सुंदर परिवार बनाया।


हम सबकी तुम प्यारी माँ...

अम्मा,अम्बा, आई कह कर हमने तुझे पुकारा

.........और कहें कभी माई,

हर सुख दुख में बस तेरी याद ही आई माँ।

तेरे ही आशीर्वाद से सारी खुशियाँ हैं आयी माँ।।


स्नेह सिंधु जीवन सरिता

तुझ पर सब कुछ वारा माँ।

तन्हाई की साथी तुम

अनुराग की सुन्दर मनोकृति

संस्कार दिये हैं जीवन के

जलती दुपहरी छाँव है माँ।


तुम हो बगिया, खिलती कलियाँ

जीवन की भिनसार हो तुम ।

मैं जीवन का चढ़ता सूरज

मेरे जीवन रथ का अभिसार हो तुम।।


छोड़ तमाम दुनियादारी तेरे आँचल में छुप जाऊँ।

तेरी गोदी में सिर रखकर फिर से मैं बच्चा बन जाऊँ।।



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