मैं चलता रहता हूँ
मैं चलता रहता हूँ
गम नहीं किसी बात का
चाहे मिले ना साथ किसी का
मैं स्वयं उन्मेषित होता हूं
मैं जीवन पथ का प्रदर्शक हूं
मैं जीवन पथ पर बढ़ता हूं
जीवन के लक्ष्यों को
हासिल करना मेरा मकसद है
कोई साथ चले न चले
पर सतत मुझको चलना है
थामे हाथों में हिम्मत की मशाल
चमका दूं मैं भारत का भाल
मैं वो नहीं जो डर जाऊं
मौक़ा मिला तो लड़ जाऊं
क्या होगा यूं ही डरने से ।
मिलेगी मंज़िल चलने से।
बन के प्रेम पुजारी
मैं प्रेम माधुर्य फैलाता हूं ।
बन के सूरज का प्रहरी
मैं सूर्य प्रकाश बिखराता हूं।
मैं गीत खुशी का गाता हूं ।
अमृत सुधा बरसाता हूं।
गम नहीं दुनिया की हिकारतों से।
अजीबो गरीब फिजूल की फितरतों से ।
मैं अपने हाथों से यारों मुकद्दर
अपना लिखता हूं...
और क्या मारेगा कोई बद्दुआ मुझे
मैं प्यार खुदा से करता हूं ।
किसी से भी नहीं डरता हूं।
जीना क्या यारों डर डर के ।
पल पल यारों मर मर के।
हिम्मत नहीं तो मर जाओ।
दो ग़ज़ ज़मीन में गड़ जाओ।
जीना अगर हो जो शान से ।
डटा रह हर तूफ़ान से।
ये आंधियां यूं ही चलतीं हैं
साहस की परीक्षा लेती हैं।
जो डट गया वो जीत गया।
कायर सबसे पिट गया।
हूं जीवन का सरताज़ मैं
मैं आज भी हूं मैं ही हूं कल में
सभी सुबहों में सभी शामों में।
जीवन के हर पैमाने में
मैं हर जगह फिट हो जाता हूं ।
कितना भी जोड़ लगा ले कोई
मैं हर दम हिट हो जाता हूं।
मैं कहीं भी फिट हो जाता हूं।
ना जलन डाह ना विद्वेष किसी से ।
ना दुराचार ना भ्रष्टाचार किसी से ।
मैं जीवन का अभिलाषी हूं।
करता हूं मैं प्रेम सभी से
मैं प्रेम नगर का वासी हूं।
दुनिया के हर कण कण में
मैं प्रेम सुधा बरसाता हूं ।
मैं जीवन पथ पर बढ़ता हूं।
सतत कार्यरत रहता हूं।
मैं चलता रहता हूं ।
केवल चलता रहता हूं।
