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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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मातृत्व-दिवस

मातृत्व-दिवस

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आज मातृत्व दिवस है

हर दिल बहुत खुश है

कोई फ़ेसबुक पर,

कोई व्हाट्सप पर,

लगाता है स्टेटस


हर शख़्स दिखाते है

वो मां के आज्ञाकारी

बेटे लव-कुश है

पर अगले ही क्षण

सबके चेहरे 


हो जाते फुस है

जब कोई पूँछता

आपकी माता का

कहां पर है,

गर्दन नीची कर,बताते

वो वृद्धाश्रम में प्रविष्ट है

यूँ दिखावे से अच्छा,


होते तुम बेटे गर सच्चा

हरदिन ही,तुम

मातृदिवस मनाते 

उस ख़ुदा को, तुम

बिना मोल ही पा जाते

कह रहा है, साखीबन तू


श्रवण कुमार की भांति

ख़ुदा होगा,

तुझसे सन्तुष्ट है।


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