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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance Inspirational

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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance Inspirational

मातबर निकले

मातबर निकले

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करो जब बात तो हर बात मोतबर निकले।

फायदा क्या है जो कोई पेड़ बे समर निकले।


राह मुश्किल भी हो कट जाता है आसानी से।

प्यार की राह का राही जो हम सफर निकले।


हम आधी रात तक बैठे हैं इंतजार किए।

की मेरा चांद सरेशाम बाम पर निकले।


वो छ: गिलास उठाता है पांच उंगली से।

जिनको शाहीन समझते थे बालो पर निकले।


वो जितने शोर मचाते थे खोखले निकले।

जितने खामोश थे लफ्जों के जादूगर निकले।



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