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Sudershan kumar sharma

Inspirational

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Sudershan kumar sharma

Inspirational

मां

मां

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मां बच्चों की जान होती है, 

सबकुछ देखकर भी अंजान होती है, 

सह लेती है मन ही मन में हर दुख को, 

मां तो अक्सर मां होती है। 

देती है बच्चों को भरपेट खाना, 


खुद भूखी रहती बना के बहाना, 

जिंदगी उसकी कुरबां होती है, 

मां तो अक्सर मां होती है। 


अपनी चन्द खुशियों को

बच्चों की झोली में डाल देती है

सर्दी हो या गर्मी बच्चों को पाल लेती है, 

सुलाती है बच्चे को सूखी चादर पे 

खुद के लिए गीली थां होती है, 

मां तो अक्सर मां होती है।  


रोज नई नई कहानी सुनाती, 

डांट डपट कर लाड लगाती, 

मिन्नतें कर कर खाना खिलाती, 

बच्चों में उसकी जान होती है

मां तो अक्सर मां होती है। 


सुबह उठकर स्नान कराती, 

रोटी सब्जी दाल बनाती, 

बच्चों के मन की डिस बनाती, 

उसे बच्चों की पहचान होती है, 

मां तो अक्सर मां होती है। 


मां हरेक फर्ज निभाये, 

जब तक बच्चा युवा न हो जाए, 

शादी तक ही उसकी पहचां होती है, 

फिर भी उसकी जिंदगी कुरबां होती है, 

मां तो अक्सर मां होती है। 


कहे सुदर्शन मां है ममता की छाया, 

कोई भी इसको समझ न पाया, 

किसी ने ना इसका कर्ज चुकाया, 

मरते दम तक इसकी बच्चों में जान होती है, 

मां तो आखिर मां होती है। 


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