STORYMIRROR

अच्युतं केशवं

Abstract

2  

अच्युतं केशवं

Abstract

माँ

माँ

1 min
93

पिघले नहीं स्वयं निज जल में,

एसी कोई बर्फ़ नहीं है।


भले विषैला होले जितना,

मनुज मनुज है सर्प नहीं है।


तेरी गोदी एक चरण धर,

मैं वामन से विष्णु हो गया,


तेरे सन्मुख झुक न सकूँ मैं,

इतना मुझमें दर्प नहीं है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract