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Smita Singh

Inspirational

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Smita Singh

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मां

मां

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उसकी नेमतों का जिक्र क्या करूं? गर्भ में ही संघर्षों का ज्ञान बतलाया हैं,

मेरे बिना बोले वो समझ जाती है, एक शब्द बोले बिना मन की भाषा का मर्म समझाया है,

किताबों के ज्ञान से परे, वो स्वयं एक पाठशाला है,

पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ , उसकी सीख स्वयंभू ज्ञानशाला है।

जीवन के संघर्षों में जाने कैसे सहजता ढूंढ लाती है?

अनुभवों की दैनन्दिनी वह, वक्त के साथ सब सीखा जाती है।

मां को देखकर संसार में, हर बच्चे का हौसला बढ़ जाता है,

उसके आशीर्वाद की शक्ति तले, दुश्वारियों का सर झुका नजर आता हैं,

गहन अंधेरी राहों में, वो ध्रुव तारा बन जाती है,

भटक जाओ तुम चाहे कितना? सही मार्ग पर ले आती है।

तपती धूप में उसके आंचल की छांव में सुकून पा जाते हैं,

आहत हों जो कभी, उसके आलिंगन मरहम बन जाते है।

ऐ मां , तेरी ममता के सत के आगे , भाग्य को झुकना पड़ता है,

गर आ जाये तू जिद पर तो, तेरी प्रार्थनाओं के आगे अनहोनी को भी रुकना पड़ता है,

तेरे किरदार को जो उकेर दे शब्दों में, ऐसी लेखनी बनी नहीं,

तेरी महिमा के आगे, कागज, कलम, स्याही का भी अस्तित्व नहीं।

स्वयं ईश्वर भी गर आ जाये धरा पे, तो तुझ पर कोई ऋचा लिख नहीं सकता,

उस परमात्मा का अस्तित्व भी, तेरी कोख में आये बिना दिख नहीं सकता।



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