माँ .....
माँ .....
ओ मेरी माँ तूने जन्म दिया है मुझको तेरे कई कर्ज़ है मुझपर,
तेरे कर्ज़ तो मैं उतार सकती नही लेकिन हर फ़र्ज़ एक बेटी होने का निभाऊंगी,
कभी कोई दुख ना हो मेरी वजह से हर पल ये ध्यान रखूँगी,
तेरी ही परछाई हूँ मैं दुनियां को ये दिखा दूंगी,
मैं कभी तुझसे कहती नही प्यार अपना जतलाती नही फिर भी हर फ़र्ज़ अपना निभाउंगी,
माना कि तुझसे ज्यादा प्यार मैने पापा से किया,
लेकिन तुझसे भी कम प्यार मैं करती नही,
हर पल तेरा रोकना टोकना कभी कभी दुखी कर देता है,
ये जानती हूँ मैं कि वो भी हमारी भलाई की खातिर है,
तू जो मुझसे रूठ जाती है कभी तो जान मेरी निकल जाती है,
तुझसे थोड़ी नोक झोंक अक्सर हो ही जाती है,
छोटी नही अब तेरी ये लाडो अपना भला बुरा जानती है,
लेकिन माँ के लिए अब भी एक छोटी बच्ची हूँ ये सोच चुप रह जाती हूँ,
माँ अपने दस बच्चो को तन्हा ही पालती है,
फिर क्यों ये बच्चे बड़े होकर एक माँ को पाल नही सकते,
ये सोचकर दर्द बहुत होता है दुनिया क्यों ऐसे करती है,
मेरा वादा है तुझसे हर पल तेरी उंगली थामे रखूँगी,
तुझको तन्हा ना छोडूंगी मौत भी गर आयी तो लड़ लूँगी,
माँ बच्चे का रिश्ता तो इस जग का अनमोल रिश्ता है,
रब ने बना कर तुझ को अपनी जगा भेजा है,
ईश्वर के बाद सबसे पहले माँ की याद आती है,
माँ ना हो जिस घर मे वो आंगन सूना सूना है ।
