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Dr Baman Chandra Dixit

Tragedy

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Dr Baman Chandra Dixit

Tragedy

माँ

माँ

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हर पल रहती तू दिल में मेरी

हँसी खुसी दर्द तकलीफों में,

रूठ गयी तू मुझसे और चली गयी

मगर तुझसे जुदा हो न सका मैं ।।


आज एक चित्र सी लटकी तू

तेरा दिया घर की दीवार पर

स्नेह नेह ममता का बहाव है

आज भी तरी इन नज़रों में।।


जब कभी उठता हूँ बड़ी भोर

अधुरी नींदों को छलते हुए

वही पहली वाली फ़िक्र परवाह

झलकता तेरी नज़रों में।।


माँ तू है, रहेगी सदा के लिए

दिल में मेरे धड़कनों की तरह,

जुदा हो न सकता तुझसे कभी

बसी है तू मेरी अनमोल यादों में।।


होते होंगे भगवान और कोई 

लेकिं मेरे लिए तू ही है मेरी माँ

हर जनम के लिए एक जगह

रखना माँ तेरे ही कोख़ में।।


जानता हूँ है तू मेरे आसपास

यहीँ कहीँ दिखती नहीँ मगर

महसूस करता रहूँ तेरी स्पर्श

सारे मेरे अधूरे अहसासों में।। 

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