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Kusum Lakhera

Inspirational

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Kusum Lakhera

Inspirational

माँ सिर्फ़ शब्द नहीं ...

माँ सिर्फ़ शब्द नहीं ...

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माँ सिर्फ शब्द नहीं वह तो अनहद नाद है ...

वह प्रार्थना है वह संगीत के सात सुर है...

वह ममता का अथाह सागर है....

वह बहती नदिया के जल सी कल कल..

करती लोकमाता सी पावन गंगा की जलधार है ।

वह तुतलाती भाषा को समझने वाली ..

वह सन्तान की मुश्किलों से लड़ने वाली ..

वह वक्त पड़ने पर पाषाण को भी ,

मोम में परिवर्तित करने वाली ।

वह छोटी चिड़िया सी होकर भी ...भयंकर गिध्द

समान कठिनाइयों का सामना करने वाली !!

लेखनी को हाथ में पकड़ाकर संतति को,

ज्ञान देने वाली । खुद अभाव को झेलकर ,

अपार सुखवसुविधा बच्चों पर लुटाने वाली माँ

तुम्हें नमन ,

तुम लक्ष्मी तुम दुर्गा तुम सरस्वती तुम यशोदा 

तुम सरिता तुम श्रद्धा तुम प्रेम स्नेह ममता से पूर्ण

सहस्त्रो भावों से पूर्ण माँ तुम्हें वंदन ।



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