STORYMIRROR

Archana kochar Sugandha

Inspirational

4  

Archana kochar Sugandha

Inspirational

माँ मैं हारा नहीं

माँ मैं हारा नहीं

1 min
207

माँ मैं हारा नहीं 

तेरे सिवा जग में मेरा कोई सहारा नहीं 

थक गया था मैं चलते-चलते 

जीवन मेरा किसी ने संवारा नहीं। 


दो घड़ी तेरी गोदी में सिर रखकर 

चैन से सोना चाहता था

साथ तेरा, 

नील गगन को भी गंवारा नहीं। 


पीठ मेरी नेह में 

किसी ने थपथपाई नहीं

जब रातों को नींद मुझे आई नहीं।

माँ तेरे सिवा 

मुझे किसी ने मीठी लोरी सुनाई नहीं। 


सितारों की दुनिया में 

में उलझा सितारा था। 

इस चकाचौंध की जगमगाती दुनिया में 

दूर-दूर तक 

कहाँ कोई हमारा था।


माँ तेरे जहान में 

साजिशों के जाल कोई भी बिछाता नहीं 

भूखा ना सोए मेरा लाल--

यहाँ तो मेरा हक भी

कोई मुझे खिलाता नहीं।


माँ मैं जीते-जी रोज मर रहा था 

अश्कों को, 

पसीने की बूँदों के हवाले कर रहा था। 

कैसे नजरअंदाज करता

तेरी ममतामयी आवाज़

दुनिया की भीड़ में 

अब मैं रह गया हूँ अनबुझा सवाल।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational