माँ को प्रणाम बारम्बार है
माँ को प्रणाम बारम्बार है
मेरी प्यारी माँ, तुम्हें मेरा प्रणाम है,
तुमको मेरा प्रणाम ये बारंबार है
निश दिन अथक परिश्रम
मरीजों की सेवा ही काम है,
अपना बच्चा घर भूखा बैठा,
पर मरीज का भोजन ही याद है ।
घर संसार भुला,
मरीज़ की सेवा ही काम है।
अपना आंगन सूना कर
चहचहाहट हर आंगन में खिलाती है।
कभी न थकती,
कभी ना हार मनाती,
मरते मरीजों को मौत के मुंह से वापस खींच लाती है।
ऐसी प्यारी माँ को मेरा बारंबार प्रणाम है।
हर माँ भगवान का रूप ही होती हैं,
निस्वार्थ सेवा, समर्पण लिए
प्रेम, करुणा का रस बरसाती हैं ।
जीवन प्रकाश की जननी ,
तुमको मेरा कोटि कोटि प्रणाम है।।
मां की ममता और
मां की कोख हमें,
दुनिया के गुण सिखाती है।
मां की लोरी हमें,
प्यारी नींद सुलाती है।
मां अपने कदमों से हमें
चलना सिखाती है।
मां ममता की मूरत है,
हमें प्यार करना सिखाती है।
मां की हर बात निराली है,
हमें वो बोलना सिखाती है।
हमारी आंखों में आंसू आते हैं,
हमें हंसना सिखाती है।
जीवन में जो भी दुख दर्द आये,
हमें उनसे लड़ना सिखाती है।
जीवन के हर मोड़ पर गर मां न मिले,
तो उसकी कमी खलती है।
मां हमको जीना सिखाती है,
तूफानों से लड़ना सिखाती है।
मां हमें हर बात का अहसास कराती है,
मां फूलों की तरह हंसना सिखाती है।
मां महान होती है,
ममता की खान होती है।
