मां बाप के बलिदानों और संघर्षों का कर्ज़
मां बाप के बलिदानों और संघर्षों का कर्ज़
वृद्धाश्रम में न भेजो मां बाप को,
उनके जीवन का तुम्हीं तो हो एक सहारा।
तुम्हारी ख़ातिर उन्होंने हरदम,
जीवन सादगी में अपना गुज़ारा।
तुम्हारी इच्छाओं के लिए उन्होंने,
अपनी इच्छाओं को हमेशा दबाया।
तुम्हें खुश रखने की खात़िर उन्होंने,
अपनी खुशियों को हरदम मिटाया ।
अपना जीवन सारा ही उन्होंने,
तुम्हारे पीछे ही तो लुटाया ।
तुम्हारे हर सुख दुख में उन्होंने,
तुमको हरदम ही है संभाला।
चोट लगी जब कोई तुमको,
उन्होंने तुमको हरदम हंसाया।
हर बुरे वक्त और मुश्किल दौर से,
उन्होंने है तुमको हमेशा बचाया।
उनकी क़ुर्बानियों को आखिर तुमने,
एक पल में है यूं ही भुलाया।
बुढ़ापे में अब जब उनको है तुम्हारी ज़रूरत,
तुमने उनको वृद्धाश्रम में है पहुंचाया?
क्यों मां के दूध के कर्ज़ को आखिर,
तुमने इस तरह से है शर्माया?
क्यों अपने पिता के संघर्षों का,
कर्ज़ तुमने इस तरह से है उतारा?
