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Taj Mohammad

Tragedy Action Inspirational

4  

Taj Mohammad

Tragedy Action Inspirational

लफ्जों के सिवा

लफ्जों के सिवा

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पैरहन में बहुत छेद थे उस गरीब के।

वो कैसे चला जाता यूं महफिले अमीर के।।1।।


लफ्जों के सिवा ना था कुछ देने को।

तोहफे में दुआएं भेजी है वास्ते रफीक के।।2।।


दिली चाहत को वो छुपाए रखता है।

उसने हंसी मांगी है बस सदके हबीब के।।3।।


नेक दिल इंसा है वो सबके ही लिए।

मुहब्बत से जीता है रिश्तों को करीब से।।4।।


वो ज्यादा जानता नही है अमीरों को।

जो गुनाहों में है पर दिखते है शरीफ से।।5।।


हर हाल पे वो शुक्र ए खुदा करता है।

वो खुश है उससे जो मिला है नसीब से।।6।।


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