STORYMIRROR

सोनी गुप्ता

Abstract

4  

सोनी गुप्ता

Abstract

लफ्ज़

लफ्ज़

1 min
290

लफ्जों की आग में

कितने रिश्ते झुलस गए, 

जो प्रेम से रहे वो

गिरने से पहले सम्भल गए, 


उनकी वो मीठी बातें

कड़वाहट में बदल गई, 

छोड़ गए हमें मझधार में

वो कितना बदल गए, 


बातें जो करनी थी उनसे

सब अनकही रह गई , 

जब कहना चाहा तो

जाने वह किधर निकल गए, 


लफ्जों की आग में

कितने रिश्ते झुलस गए, 

जो प्रेम से रहे वो

गिरने से पहले सम्भल गए! 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract