STORYMIRROR

Shristi Sri.

Tragedy

2  

Shristi Sri.

Tragedy

लम्हें

लम्हें

1 min
135

वो जो खूबसूरत सी कुछ यादें हैं,

वो ही अब मेरे जीने का सहारा है

पास आता दिखता तो है,

पर बहुत दूर मेरी खुशियों का किनारा है

गुज़रे लम्हों की मीठी फुहार में भीगते हैं बस

न कोई आरज़ू ,न सपना ,

अब तो खुद ही रूठना ,खुद को ही मनाना है 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy