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Shristi Sri.

Romance

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Shristi Sri.

Romance

कुछ नहीं

कुछ नहीं

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तुम गए तो यूं लगा

सांसें भी थम गई।


अब न कोई गम है,

किसी बात की खुशी नहीं।


हर एहसास जैसे

बैगाना सा हो गया।


ज़िन्दगी बेरंग है,

अब इसमें कोई रंग नहीं।


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