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Sadhna Mishra

Inspirational

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Sadhna Mishra

Inspirational

लक्ष्य

लक्ष्य

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वो बड़ी दूर तक साथ आती रही, 

 मेरी मैय्यत पे आंसू बहाती रही।


दूर करके सिंदूर बिंदिया को वो, 

 अश्को से मुझे ही सजाती रही।


सांसे टूटी मगर लक्ष्य छूटा नहीं,

बाद मेरे वो सरहद पे जाने लगी।


सांस सांस में लक्ष्य नए धारकर,

दुश्मनों की हस्ती मिटाने लगी।


माथे माटी से चंदन लगाने लगी,

 मातृभूमि के यश को बढ़ाने लगी।


वो बड़ी दूर तक साथ आती रही,    

  मेरी मैय्यत पे आंसू बहाती रही। 


दूर करके सिंदूर बिंदिया को वो,

अश्कों से मुझे ही सजाती रही।


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