STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Abstract

3  

Kavita Sharrma

Abstract

लकीर

लकीर

1 min
135

इक लकीर खींच कर देश को सरहद में बाँध दिया

हाथों की लकीरों ने भाग्य दिखा दिया

जीवन रेखा छोटी है या बड़ी यह बात मामूली नहीं

किसी की जिंदगी में हो सकती है कीमती

इन लकीरों को खींच कर शब्द बन गये

कुछ सीधे तो की घुमावदार लिखे गये

पन्नों से किताबों का सफ़र है इन लकीरों का

इन किताबों को पढ़कर कोई ज्ञानी हो गया

चित्रकार ने जब तूलिका से खींचीं ऐसी लकीरें

मानो जीवंत रचनाएं बोल उठी हों जैसे

लकीरों का खेल है बड़ा चमत्कारी

इनके आगे दुनिया नतमस्तक है सारी 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract