yuvrajsinh Jadav
Action Classics Inspirational
हमारे शब्दों में
इतनी शक्ति हे कि,
वो चंद लब्जों से सर कटे
इंसान में भी
लड़ने का जज़्बा जगा दे।
लब्ज
तीन रंगों का ...
वक़्त को बदलते...
प्यार के अँगा...
में भारत हूँ
पांचाली का हो रहा स्वयंवर, या राजसूय की हो तैयारी , पांचाली का हो रहा स्वयंवर, या राजसूय की हो तैयारी ,
अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।। अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।।
उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के निमित्त होता है। उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के नि...
आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन बन पायेंगे। आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन...
क्योंकि स्त्री की तरह इस शिकार के साथ जीना इतना आसान नहीं। क्योंकि स्त्री की तरह इस शिकार के साथ जीना इतना आसान नहीं।
अरब और मुगल तो अब तक विनाश ही करते आये स्वयं का धर्म, संस्कृति ही सर्वश्रेष्ठ है, अरब और मुगल तो अब तक विनाश ही करते आये स्वयं का धर्म, संस्कृति ही सर्वश्रेष...
तांडव नृत्य से सृष्टि का कर रहे संहार ! तांडव नृत्य से सृष्टि का कर रहे संहार !
जब मैं समाज में बैठूँ तो बगल वाला पास से उठ जाता है। मंदिर में मेरा जाना जैसे अछूत ही जब मैं समाज में बैठूँ तो बगल वाला पास से उठ जाता है। मंदिर में मेरा जाना जैसे...
ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे
कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है। कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है।
रणभूमि में आज, मचा गया भूचाल। रणभूमि में आज, मचा गया भूचाल।
कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं। कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं।
यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है। यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है।
वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी
एक पहचान वो है जो जन्म से आयी, एक मिली उस से जो शिक्षा पायी, एक पहचान वो है जो जन्म से आयी, एक मिली उस से जो शिक्षा पायी,
पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया। पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया।
अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे। अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे।
जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे
पापा-मम्मी के साथ दिवाली मनाई। और रेलगाड़ी की मौज मनाई। पापा-मम्मी के साथ दिवाली मनाई। और रेलगाड़ी की मौज मनाई।
चित्त से सीता, रावण के निकली l तब राम ने, रावण को मारा है चित्त से सीता, रावण के निकली l तब राम ने, रावण को मारा है