STORYMIRROR

Ramanpreet -

Abstract

4.8  

Ramanpreet -

Abstract

लाज़मी है

लाज़मी है

1 min
625


जिन लफ़्ज़ों को ज़ुबाँ ना मिल सके

उन्हें सियाही का रंग देना लाज़मी है


दफ़न कर अपने दिल में उन्हें

कफ़न तक ले जाना कहाँ लाज़मी है


अश्कों में जो अल्फ़ाज़ बह ना सक

उन्हें मुस्कान से रौशन करना लाज़मी है


दुनिया के तानों से दब ना सके

ऐसा हौसला खुद में जगाना लाज़मी है


ज़िंदगी के सागर में जो मिल सके

खुद में खुशी की वो नदियां बहाना लाज़मी है।




Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract