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Ramanpreet -

Romance


5.0  

Ramanpreet -

Romance


जुदाई

जुदाई

1 min 230 1 min 230

आज दिल कुछ बंद सा है

साँसों की रफ्तार भी मंद सी है


जाने क्या वो बात हुई

जिसकी मीठी चुभन दिल को छुई 


और उसके मुँह मोड़ते ही लगा 

जैसे मेरे भीतर ही कांप गया कोई


उसके वापस आने की आस रखूँ 

या उन चंद मुलाकातों का एहसास रखूँ 


जो अब भी दिल के करीब है

और जिसमें हमारे विश्वास की नीव है


सच कहूँ तो दोस्तो आज जाना हमने

ये जुदाई का मौसम कितना अजीब है


मानो ये मौसम - वक़्त नहीं कोई रकीब है।


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