shekhar kharadi
Tragedy Classics
बाहरी हलचल में
भीतर द्वंद्व युद्ध है।
आध्यात्मिक ख़ोज में
भावनात्मक दौड़ है।
शांति की तलाश में
संसारिक मोह है।
करुणा के पुकार में
स्वार्थ का प्रवाह है।
मुक्ति की तलाश में
जीने की लालसा है।
ममतामय स्नेह
धनुषाकार वर्ण...
वर्ण पिरामिड ...
शाश्वत नश्वर
प्रेम का स्पर...
क्षणिका
कटीं हुई पतंग
तांका लघु काव...
मोर्डन शहर
द्रौपदी मुर्म...
जिंदगी से जान पहचान मे हम, खुद ही की जान से अंजान रह जाते हैं। जिंदगी से जान पहचान मे हम, खुद ही की जान से अंजान रह जाते हैं।
अपने पुरुषत्व पर क्यों है गुमान इतना क्यों खोखले अहंकार में तू झूल रहा है अपने पुरुषत्व पर क्यों है गुमान इतना क्यों खोखले अहंकार में तू झूल रहा है
यह बेरोजगारी,कब कम होगी। महंगाई यह, कब कम होगी। यह बेरोजगारी,कब कम होगी। महंगाई यह, कब कम होगी।
रिवायत इश्क़ की तुम तो भूल गए हम तो तुम्हारे थे तुम हमें छोड़ गए. रिवायत इश्क़ की तुम तो भूल गए हम तो तुम्हारे थे तुम हमें छोड़ गए.
नशा ना करना तुम यारो,सब कहते बड़ी बीमारी हैl नशा ना करना तुम यारो,सब कहते बड़ी बीमारी हैl
खेल रहे वो खून की होली हम रंगों से खेलें कैसे। खेल रहे वो खून की होली हम रंगों से खेलें कैसे।
जिंदा रहे हमारा शरीर रूपी घर ऐसे मिटा दो, समाज से सब निशाचर जिंदा रहे हमारा शरीर रूपी घर ऐसे मिटा दो, समाज से सब निशाचर
सबकी चुनौतियां तुमने स्वीकार कीं तुमने ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी सबकी चुनौतियां तुमने स्वीकार कीं तुमने ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी
निर्देशक चिन्ह बन कर किसी के संवाद का विषय बनना नहीं चाहती मैं। निर्देशक चिन्ह बन कर किसी के संवाद का विषय बनना नहीं चाहती मैं।
हर गिला शिकवा को मानो, लग गए हों पंख। आँखों में जिसके बसे हम, वह भी मारे डंक।। हर गिला शिकवा को मानो, लग गए हों पंख। आँखों में जिसके बसे हम, वह भी मार...
न डरना है, न ठहरना है, तुमको ग़र चलना है ! न डरना है, न ठहरना है, तुमको ग़र चलना है !
जन हित, लोक कल्याण की दुहाई दी जाएगी, कुछ मुफ्त सामग्री देकर भावनाएं खरीदीं जायेंगीं। जन हित, लोक कल्याण की दुहाई दी जाएगी, कुछ मुफ्त सामग्री देकर भावनाएं खरीदीं ज...
दुनिया है बँटी हुई दो धड़े हैं बन गए युद्ध भूमि में वहाँ ना जाने कितने मर रहे । दुनिया है बँटी हुई दो धड़े हैं बन गए युद्ध भूमि में वहाँ ना जाने कित...
खुदा तूने भी सितम हमको बे-सबब दे दिया है।। खुदा तूने भी सितम हमको बे-सबब दे दिया है।।
आदत हो गई थी उससे बतियाने की, लेकिन क्या सिर्फ़ मां ने खोया? आदत हो गई थी उससे बतियाने की, लेकिन क्या सिर्फ़ मां ने खोया?
सज़ा ए सुख की हकदार को दमन कर दासी बनाए जाते हो, सज़ा ए सुख की हकदार को दमन कर दासी बनाए जाते हो,
मन में छाई लालिमा भी ताने मारकर कहती है पगली कभी इश्क मोहब्बत की भी बात किया करो मन में छाई लालिमा भी ताने मारकर कहती है पगली कभी इश्क मोहब्बत की भी बात किया ...
अनेकता में एकता इसकी पहचान, और समानता ही बनें इसका मंत्र। अनेकता में एकता इसकी पहचान, और समानता ही बनें इसका मंत्र।
विनाश के लिए बढ़ो अमित्र से नहीं डरो समूल शत्रु नाश हो तभी सुशस्त्र को धरो। विनाश के लिए बढ़ो अमित्र से नहीं डरो समूल शत्रु नाश हो तभी सुशस्त्र को धरो।
कड़कड़ाती ठंड में छाया सघन कोहरा, ठंड इतनी फूलों पर भी ना मंडराया भौंरा। कड़कड़ाती ठंड में छाया सघन कोहरा, ठंड इतनी फूलों पर भी ना मंडराया भौंरा।