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Satyendra Gupta

Abstract

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Satyendra Gupta

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क्या यही प्यार है

क्या यही प्यार है

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मुझे अच्छा लगा की,

तुम्हें मेरे लिए एहसास है।


क्या तुम्हें अच्छा लगा की ,

तुम्हारे लिए मुझे भी एहसास है।


न जाने क्यों मेरी दिल की बातें ,

जान जाती हो।

न जाने क्यों तुम्हारी दिल की बातें ,

मैं जान जाता हूं।

ये पिछले जन्मो का रिश्ता है,

या इस जन्म का प्यार है,

क्या यही प्यार है।


जब बहुत दिनों तक ,

मिल नहीं पाता हूं तुमसे,

जब बहुत दिनों तक बात,

नहीं कर पाता हूं तुमसे,

लगता है दुनिया उदास सा,

लगता है चेहरा मायूस सा,

फिर अचानक सपने में आना,

और प्यारी प्यारी छेड़खानी करना,

क्या यही प्यार है।


जब तुम सामने होती हो,

मधुर आवाज में बोलती हो,

तुम्हारी आवाज सुनते हुए,

तुम्हारी चेहरे को देखना,

अपनी अपनी आंखों में,

एक दूसरे को देखना,

एक दूसरे में खोते हुए,

जो बातें किए थे,

बाद में वो बातें याद करके,

थोड़ा थोड़ा मुस्कुराना,

क्या यही प्यार है।


याद है तुम्हें

जब पहली बार मिले थे हम दोनों,

क्या मुलाकात थी हमारी

दिल की धड़कने तेज हो गई थी,

शरीर में अजब सी हलचल हो गई थी,

तुम्हें देख कर मेरी आंखें पलकें झपकाना भूल गई थी,

तुम्हें देखते रहना और देखते रह जाना,

अजीब सी सपनों में खो जाना,

सिर्फ तुम और तुम्हारे लिए सोचना,

क्या यही प्यार है।


न जाने कितने दिन गुजार दिए तुम्हारे प्यार में,

और एक दिन ये कहना की भूल जाओ मुझे,

क्या आसान है भूल जाना,

तुम्हारे साथ गुजारे हुए वो सुखद एहसास को,

क्या आसान है भूल जाना,

अपनी पहली पहली प्यार की दास्तान को,

तुम्हारी खुशी के लिए तुम्हें भूल जाना,

क्या यही प्यार है।


तुम दुनिया बसा लो अपना,

मैं तो नही बसाऊंगा,

तुम्हारे साथ होंगी मजबूरियां,

मैं कहां से मजबूरियां लाऊंगा,

मैं तुम्हारे बिना क्या ,

इस धरती पे जी पाऊंगा,

अगर साथ छोड़ना ही था,

तो प्यार क्यों किया,

अगर मुझे रुलाना ही था,

तो प्यार क्यों किया,

क्या यही प्यार है।


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