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neha chaudhary

Abstract Tragedy

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neha chaudhary

Abstract Tragedy

क्या कहूं इस जिंदगी के बारे मे

क्या कहूं इस जिंदगी के बारे मे

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क्या कहूं इस जिंदगी के बारे में

   ये तो ढलती जा रही है

आँसुओं के किनारे में

   हर दिन कुछ नया सिखा रही है

 ये जिंदगी, किस तरह कहर ढा रही है

   लोग लगे हैं, पैसा कमाने में

 मैं ढूंढ रही हूँ हर दिन

   खुशियाँ इस ज़माने में 

क्या कहूं इस जिंदगी के बारे में

   क्या कहूं इस जिंदगी के बारे में...........

हर सुबह सूरज को मनाती हूँ

   देर मत करना चाँद को लाने में

थोड़ा मुस्कुरा देती हूँ

   लगी हूँ आंसू  छुपाने में

मैं ढूंढ़ती हूँ अपनों को

   इस बेगाने ज़माने में

क्या कहूं इस जिंदगी के बारे में

  क्या कहूं इस जिंदगी के बारे में..............

हर दिन एक सबक सिखाता है

   बीता हुआ कल वापस नहीं आता है

क्यूँ गुजारे अपना आज, बीती यादों में

   चल कोशिश करते हैं 

आज को खुशहाल बनाने में

  क्या कहूं, इस जिंदगी के बारे में

क्या कहूं, इस जिंदगी के बारे में............


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