Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

क्या छिपा रहे हो

क्या छिपा रहे हो

1 min 237 1 min 237

क्यों छुप रहे हो क्या छिपा रहे हो

किस आस को जाते देख रहे हो

चाँद सा सुंदर चेहरा छिपाये नहीं

छिपता


ये पलकें इनमें समायी ख्वाहिशें

टक टकी आंखों में उनकी यादें

नहीं छिपती वो ख़ुशियों के पल

जो प्रेमी समेट ले गया


वो आस जो ग़म में बदल दिया

मगर छुपा कर भी दिख रही है

तुम में

इक चिंगारी जो न जाने कब

भड़क उठे


दहलीज़ से सटे दिल पर तेरा पहरा

गलियां जो रोक रखें हैं तेरे अरमान

ललाट है सीने में भरने को उड़ान 

बस ज़रा सी देर है थोड़ा सा

अंधियारा


दूर कहीं तेरा मंज़र नज़र आ रहा

जहां जिंदगी तुम्हारी इंतजार में

रुकी है 

जिस ओर डगर है उस ओर

नज़र झुकी है

कदम बढ़ा लेना

इस बार अपना नसीब

खुद लिखते जाना ।।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Gomathi Mohan

Similar hindi poem from Romance