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अनामिका वैश्य आईना

Drama Horror Romance


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अनामिका वैश्य आईना

Drama Horror Romance


कविता

कविता

1 min 107 1 min 107

मेघ सघन मिलने को तरसे

सावन नभ से भूमि पर बरसे


मधुर-मधुर से संगीत सुनाये

प्रेम की थाली मुझको परसे


छाया बन राह में साथ चलो 

फ़िर चाहे दुनिया ये झरसे


नदिया बहती धुन में अपनी

दिलकश कूल मिले न अरसे


तिमिर झुके कदमों में आके

कर दो न प्रेम की वर्षा कर से


प्रिय मीलों की दूरी बेशक है

ये क्षितिज मन भाव से बरसे।


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