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Abha Chauhan

Abstract

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Abha Chauhan

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कविता

कविता

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आंखों से बह निकली अश्रु की सरिता

तब मैंने लिखनी छोड़ दी कविता


जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया

कलम मेरी छूट कर गिर गई

जिंदगी का कोई ठिकाना ना रहा

चारों ओर अंधियारे से घिर गई


लड़खड़ा गए रास्ते पर मेरे कदम

लुट गई खुशियां मिल गए गम

ना दिल में कोई उमंग रही ना जीने की चाहत

मिट गए सपने धूमिल हो गया सब


रोज किसी उम्मीद की किरण का

बेसब्री से कर रहा हूं इंतजार

थाम ले मेरी सूनी बाहों को कोई

फिर से आ जाए जिंदगी में प्यार


सिर्फ इतनी सी चाह है मेरी

जीवन में फिर से बहे प्यार की सरिता

कलम उठाकर शुरु कर दूं

लिखनी मैं फिर से कविता!



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