Chandramohan Kisku
Abstract
कविता का पेड़
बड़े होने के लिए
जरूरत नहीं पड़ती।
उर्वरा मिट्टी की
रसायनिक खाद की
कविता की पेड़
बड़े होने के लिए।
जरूरत होती है
आजाद मन की
खाली जमीन।
नरम दिल की
सींचाई और
प्यार की बीज।
समर्पण :कविता...
उसका भविष्य
मेरा भी प्रश्...
मलाला
तुम और मैं
लिखूंगी
प्यार का घर
आँसू की बूँद ...
चिड़ियाँ को मा...
आगे ही चलते र...
इंसान को बुद्धि देकर किया तुमने कितना उपकार इंसान को बुद्धि देकर किया तुमने कितना उपकार
राष्ट्रप्रेम की भावनाओं का, जिनको होता नहीं है अर्थ उन नरों का जीवन भी क्या है राष्ट्रप्रेम की भावनाओं का, जिनको होता नहीं है अर्थ उन नरों का जीवन भी क्या ह...
जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूरा करते दे जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूर...
इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई। इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई।
दिल की भावनाएं मस्तिष्क समझे नहीं, दिल को मस्तिष्क की बातें माननी नहीं, सही ग़लत का उलझन दिल क... दिल की भावनाएं मस्तिष्क समझे नहीं, दिल को मस्तिष्क की बातें माननी नहीं, सही ग़लत...
हिंदी का सम्मान हमारा स्वयं का देश का है सम्मान, हिंदी का सम्मान हमारा स्वयं का देश का है सम्मान,
तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हारे पैरों के नीचे एक ... तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हा...
यहाँ तो दरिया में पड़े पत्थर की तरह कतरा कतरा टूटा हूँ मैं यहाँ तो दरिया में पड़े पत्थर की तरह कतरा कतरा टूटा हूँ मैं
दिल में कसक सी बाकी रह जाती है दिल में कसक सी बाकी रह जाती है
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
हमने अंग्रेज़ी में सोचना सीख लिया है, पर हम महसूस हिंदुस्तानी में करते हैं. हमने अंग्रेज़ी में सोचना सीख लिया है, पर हम महसूस हिंदुस्तानी में करते हैं.
थम सी जाती ज़िन्दगी और समय चक्र मुस्कुराता कहीं थम सी जाती ज़िन्दगी और समय चक्र मुस्कुराता कहीं
चलो दिवाली का एक नया रूप हम दिखाते हैं, दिवाली ऐसी भी होती आप सबको बताते हैं। चलो दिवाली का एक नया रूप हम दिखाते हैं, दिवाली ऐसी भी होती आप सबको बताते हैं।
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
शब्दों की अपनी गरिमा है, भावों की अनुपम महिमा है। मृदु मंत्रों के पुष्पहार से, अनघ हृद... शब्दों की अपनी गरिमा है, भावों की अनुपम महिमा है। मृदु मंत्रों के पुष्...
नीर भरी अंखियों में तुमने, पीड़ा की गहराई दी, नीर भरी अंखियों में तुमने, पीड़ा की गहराई दी,
गुप्त आत्मालाप से जाग्रत हो उठती है, आत्म अनुभूतियाँ। गुप्त आत्मालाप से जाग्रत हो उठती है, आत्म अनुभूतियाँ।
कैसे पूजा हो माँ तेरी, या कि करूँ मैं पाठ। जाने कैसी बुद्धि हमारी, उम्र हो&n... कैसे पूजा हो माँ तेरी, या कि करूँ मैं पाठ। जाने कैसी बुद्धि हम...
तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में, तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में,