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Brijlala Rohanअन्वेषी

Inspirational

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Inspirational

कवि नहीं मैं !

कवि नहीं मैं !

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कवि नहीं मैं ,जो कविता कर सकूं ,कवित्त गढ़ सकूं !

न मुझे छंदो का ज्ञान है! न हीं बिंबो का बिधान है ,

मुझमें ! न कल्पना शक्ति मुझमें जिससे मैं शब्दों का

परिष्कार भावों को व्यक्त करने में कर सकूं !

लेकिन मैं फिर भी कविता लिखता हूँ।

जो मैं अनुभव करता उसी को कोरे कागज पर उतार देता हूँ ।

जिस विरह में मैं खुद जीता और दूसरों को विह्वल पाता

उसे ही व्यक्त कर देता ।जिस रोटी के लिए मैं तड़पता और

दूसरों को तड़पता पाता उसी को पत्र पर पाट देता ।

जिस प्रेम में पागल रहता ,जिसके ख्यालों में खोया रहता

उसी को खत पर लेखनी पर खुरेद देता ।

मदद के लिए सिसकती आवाज बन

अंतरतम की पीड़ा को परखने की कोशिश करता ।

नारियों और शोषितों के अधिकार और हलधर,

हथौड़ा वाले के हक के लिए उठाया है मैंने कलम ।

बहरी कानों तक क्रांति की गूँज पहुँचाने के लिए उठाया है ,मैंने ये कलम ।

पृथ्वी की बढ़ती दुर्दशा को दिखाने के लिए उठाया है ,मैंने ये कलम।

कवि नहीं हूँ, सच कहता हूँ मैं कवि नहीं हूँ।

मैं तो बस बंजर कागज पर विचार अपना बोता हूँ।



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