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Bhoop Singh Bharti

Action Inspirational

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Bhoop Singh Bharti

Action Inspirational

कुंडलिया

कुंडलिया

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भटका सालों साल था, ऊधम मन में ठाण।

आखिर बदला ले लिया, हर डायर के प्राण।


हर डायर के प्राण, शपथ की लाज निभाई।

डायर का कर खून, बाग की आग बुझाई।


कहे ’भारती’ खूब, कसूता  मेटा  खटका।

बदला  लेने  शेर, देश  विदेश में  भटका।


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