Bhoop Singh Bharti
Action Inspirational
भटका सालों साल था, ऊधम मन में ठाण।
आखिर बदला ले लिया, हर डायर के प्राण।
हर डायर के प्राण, शपथ की लाज निभाई।
डायर का कर खून, बाग की आग बुझाई।
कहे ’भारती’ खूब, कसूता मेटा खटका।
बदला लेने शेर, देश विदेश में भटका।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
मेरे लिए मेरी माता साक्षात देवी समान है, मेरे लिए मेरी माता साक्षात देवी समान है,
टूटा दिल लेकर जाए कहां। हर शाम गुजरती है अब तो मयकदे में टूटा दिल लेकर जाए कहां। हर शाम गुजरती है अब तो मयकदे में
नजरों का हर ख्वाब बना है दुश्मन हमारा। नजरों का हर ख्वाब बना है दुश्मन हमारा।
योग से बदलाव आता है जीवन में योग से जीवनशैली बदल जाती है योग से बदलाव आता है जीवन में योग से जीवनशैली बदल जाती है
आज तलक जन जानते, कितना मैं अज्ञान, कितने ही जन घूमते, होते बड़े ही महान।। आज तलक जन जानते, कितना मैं अज्ञान, कितने ही जन घूमते, होते बड़े ही महान।।
अनियंत्रित अवस्था का तो कर देना उसका विखंडन ... विस्फोटक के रुप में। अनियंत्रित अवस्था का तो कर देना उसका विखंडन ... विस्फोटक के रुप में।
मुझे लगता है कि अब तुम अलग ख़्वाब आँखों में सजा रहे हो मुझे लगता है कि अब तुम अलग ख़्वाब आँखों में सजा रहे हो
बिटिया मेरी बचपन से शरारती, जब-जब हँसी तो टेंशन दूर हुई। बिटिया मेरी बचपन से शरारती, जब-जब हँसी तो टेंशन दूर हुई।
और राम नाम जपते जपते ही पहुंच जाएगा तू प्रभु के धाम। और राम नाम जपते जपते ही पहुंच जाएगा तू प्रभु के धाम।
बस अब बहुत हुआ खुद ही अपमानित बस अब बहुत हुआ खुद ही अपमानित
ये गुनाह है कमबख्त दिल का। पर सजा मेरी रूह को है मिली ये गुनाह है कमबख्त दिल का। पर सजा मेरी रूह को है मिली
जगत की बेड़ियाँ तोड़ के सारी, शांतिदूत न बना दूँ तो बोल। जगत की बेड़ियाँ तोड़ के सारी, शांतिदूत न बना दूँ तो बोल।
हर वक़्त निभाती है, अपनों का साथ। चाहे कितनी भी हो बड़ी, कोई बात।। हर वक़्त निभाती है, अपनों का साथ। चाहे कितनी भी हो बड़ी, कोई बात।।
चांदनी में तेरा हुस्न है परियों सा। दिल करे तुझे चाहूं सुबह से शाम तक चांदनी में तेरा हुस्न है परियों सा। दिल करे तुझे चाहूं सुबह से शाम तक
हिम्मत किसकी है इस, धरा को खुद में मिलाने की हिम्मत किसकी है इस, धरा को खुद में मिलाने की
उनको कर्म जीवन का शुभारंभ करवाते हुए उनको कर्म जीवन का शुभारंभ करवाते हुए
कैद कैसे करोगे चाहत, दिल की ! कुछ मुहब्बतें ना इंसानी, होती है ! कैद कैसे करोगे चाहत, दिल की ! कुछ मुहब्बतें ना इंसानी, होती है !
हर मुश्किल से जा टकराये। हिम्मत बांध खड़ा हो जाये। हर मुश्किल से जा टकराये। हिम्मत बांध खड़ा हो जाये।
निंदा रस में मन लगाना नहीं अपनी असफलताओं के लिए किसी को दोषी ठहराना नहीं, निंदा रस में मन लगाना नहीं अपनी असफलताओं के लिए किसी को दोषी ठहराना नहीं,
आज फिर वो हमको रुला कर चला गया है आज फिर वो हमको रुला कर चला गया है