Bhoop Singh Bharti
Action Inspirational
भटका सालों साल था, ऊधम मन में ठाण।
आखिर बदला ले लिया, हर डायर के प्राण।
हर डायर के प्राण, शपथ की लाज निभाई।
डायर का कर खून, बाग की आग बुझाई।
कहे ’भारती’ खूब, कसूता मेटा खटका।
बदला लेने शेर, देश विदेश में भटका।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
आज भी उन्हें करीब से जानने वाले लोग सगर्व दिया करते हैं आज भी उन्हें करीब से जानने वाले लोग सगर्व दिया करते हैं
मशीन का और गुलाम बनाता है, मशीन का और गुलाम बनाता है। मशीन का और गुलाम बनाता है, मशीन का और गुलाम बनाता है।
सूरज चाँद और तारे आदि सभी प्रकृति संसाधन, सूरज चाँद और तारे आदि सभी प्रकृति संसाधन,
साधारण से असाधारण की यात्रा सफल यह करवाये ।। साधारण से असाधारण की यात्रा सफल यह करवाये ।।
परिहास या लज्जा का नहीं अभिमान का विषय होंगे प्रतीक्षा रहेगी अनवरत ....... परिहास या लज्जा का नहीं अभिमान का विषय होंगे प्रतीक्षा रहेगी अनवरत .......
कोई सीधे कोई तिरछे कोई चलता आड़ी चाल। पर सब चालें हैं और की जो बुनता अपना जाल। कोई सीधे कोई तिरछे कोई चलता आड़ी चाल। पर सब चालें हैं और की जो बुनता अपना जाल...
भारत का इतिहास पुराना, कितना गौरवशाली है, भारत का इतिहास पुराना, कितना गौरवशाली है,
मुट्ठी भर गोरे क्या करते, हमारे बीच ही आपस में बड़ी दरार पड़ी थी। मुट्ठी भर गोरे क्या करते, हमारे बीच ही आपस में बड़ी दरार पड़ी थी।
बहुत क़िस्मत वाले बच्चों में से एक बच्चा हूँ मैं, बहुत क़िस्मत वाले बच्चों में से एक बच्चा हूँ मैं,
हुए सुनकर अरब भयाक्रांत, शौर्य तलवारों की टंकार।। हुए सुनकर अरब भयाक्रांत, शौर्य तलवारों की टंकार।।
निर्भय निश्चिन्त निःशोक होकर प्रभु के सर्वथा अनन्य शरण में होना। निर्भय निश्चिन्त निःशोक होकर प्रभु के सर्वथा अनन्य शरण में होना।
माँ, कितनी विशाल धरा की, संतान संस्कारों से गढ़ती हैं। माँ, कितनी विशाल धरा की, संतान संस्कारों से गढ़ती हैं।
पैसा फेंक कर किसी को भी झुका सकते है। दुनिया को उंगलियों पर नचा सकते हैं। पैसा फेंक कर किसी को भी झुका सकते है। दुनिया को उंगलियों पर नचा सकते हैं।
ऐसी ही सोना परी, स्वप्न्न लोक में विचरती। बाल मन मे, प्यारे प्यारे संस्कार वो भरती।। ऐसी ही सोना परी, स्वप्न्न लोक में विचरती। बाल मन मे, प्यारे प्यारे संस्कार व...
आज मैं अपना एहसास लिए रोता हूँ! लोग पूछते हैं सवाल.., तो चुप करता हूँ!! आज मैं अपना एहसास लिए रोता हूँ! लोग पूछते हैं सवाल.., तो चुप करता हूँ!!
अपने केंद्रीय सरकार की सेवा में उन्होंने कभी किसी भी परिस्थिति में अपना आत्मविश्वास अपने केंद्रीय सरकार की सेवा में उन्होंने कभी किसी भी परिस्थिति में अपना...
अन्ना ने शिष्य-नेता से फिर उठाया वही सवाल, अन्ना ने शिष्य-नेता से फिर उठाया वही सवाल,
खुद की शक्ति को जो पहचाने, इससे बड़ी कोई भक्ति नहीं, खुद की शक्ति को जो पहचाने, इससे बड़ी कोई भक्ति नहीं,
फिर मुझे इनकी प्राप्ति में क्यों असन्तोष होता है ? फिर मुझे इनकी प्राप्ति में क्यों असन्तोष होता है ?
मुगलों और अंग्रेजों के तुम, स्वतंत्र होकर भी रहे हो दास मुगलों और अंग्रेजों के तुम, स्वतंत्र होकर भी रहे हो दास