Bhoop Singh Bharti
Action Inspirational
भटका सालों साल था, ऊधम मन में ठाण।
आखिर बदला ले लिया, हर डायर के प्राण।
हर डायर के प्राण, शपथ की लाज निभाई।
डायर का कर खून, बाग की आग बुझाई।
कहे ’भारती’ खूब, कसूता मेटा खटका।
बदला लेने शेर, देश विदेश में भटका।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
पांचाली का हो रहा स्वयंवर, या राजसूय की हो तैयारी , पांचाली का हो रहा स्वयंवर, या राजसूय की हो तैयारी ,
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत
सशक्त है वो साकार भी है ये नारी है, जीवन का सार भी है ये। सशक्त है वो साकार भी है ये नारी है, जीवन का सार भी है ये।
असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥ असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥
बस कुछ इस तरह, अपनी जिन्दगी से खुद के लिए खुशियों के कुछ पल चुरा लेती हूँ। बस कुछ इस तरह, अपनी जिन्दगी से खुद के लिए खुशियों के कुछ पल चुरा लेती हूँ।
सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों का मतलब और मकसद ही ... सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों...
ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे
करो प्रकाश, सूर्य अम्बर पर आओ, छटे दुःख के बादल, हर्ष को बरसाओ करो प्रकाश, सूर्य अम्बर पर आओ, छटे दुःख के बादल, हर्ष को बरसाओ
कौन है वहां कौन है वहां मैं बोल रहा लेकिन अंधियारों में ना कोई बोल रहा कौन है वहां कौन है वहां मैं बोल रहा लेकिन अंधियारों में ना कोई बोल रहा
पेड़ भले ही सारे काटे हो, पर फिर भी ऑक्सीजन पा जाएं हम। पेड़ भले ही सारे काटे हो, पर फिर भी ऑक्सीजन पा जाएं हम।
नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।। नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।।
रोज ही आशीष मिलता था चरण छूए बिना अब नमस्ते का न उत्तर आ गये परदेश में। रोज ही आशीष मिलता था चरण छूए बिना अब नमस्ते का न उत्तर आ गये परदेश में।
जीवन से इतनी हो गई थी पीड़ा नस-नस को डसता था तुम्हारी बेरुखी का कीड़ा। जीवन से इतनी हो गई थी पीड़ा नस-नस को डसता था तुम्हारी बेरुखी का कीड़ा।
सूरज नहीं है तो क्या हुआ जुगनुओं की रोशनी तो बार-बार आती है सूरज नहीं है तो क्या हुआ जुगनुओं की रोशनी तो बार-बार आती है
अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे। अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे।
वक्त से डरकर रहना सीख लो ऐ मानव, ठोकर मारने से कभी, पर्वत नहीं हिलता।। वक्त से डरकर रहना सीख लो ऐ मानव, ठोकर मारने से कभी, पर्वत नहीं हिलता।।
तीन कपड़ों में तुम्हें ब्याह कर लाए थे अपने होनहार बेटे के लिए तीन कपड़ों में तुम्हें ब्याह कर लाए थे अपने होनहार बेटे के लिए
आज कैसी सौगात तू दे गया अपनी प्यारी मुन्नी को तू आज कैसे अकेला छोड़ गया आज कैसी सौगात तू दे गया अपनी प्यारी मुन्नी को तू आज कैसे अकेला छोड़ गया
देख तिरंगा लहराता हमें नाज़ देश पर होता है सोचो आज़ादी पाने को एक वीर क्या खोता है देख तिरंगा लहराता हमें नाज़ देश पर होता है सोचो आज़ादी पाने को एक वीर क्या खो...