STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

2  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

कुंडलिया

कुंडलिया

1 min
259

लोहे पे चाहे जंग लगे

अपने मन पर न लगे

सोना चाहे मलीन हो मन सदा क्लीन हो

हार हो या जीत हो सत्य ही मनमीत हो

कोई कुछ भी कहे आप मन की करे

अच्छे मन को जाने बुरे मन को मारे

मन को बनाये पाक चाहे लोग काटे नाक

जिसका अच्छा काम वो बिकेगा आम

जो रहेगा ईमानदार वो बनेगा थानेदार

वो पिटेगा सरेआम जो करेगा बुरा काम

शूल भी लगेंगे फूल संघर्ष न जाना भूल



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational