STORYMIRROR

Shalini Prakash

Abstract

4  

Shalini Prakash

Abstract

कुछ

कुछ

1 min
24.7K

ऐसा क्यों लगता है कभी कभी

की हाथों से कुछ छूट रहा है,


अब सब कुछ खाली हो गया,

मेरे पास कुछ नहीं बचा, 


लगता है समेट लूँ सब कुछ,

पर ये कुछ है क्या पता नहीं,


एक ही आलमारी को सौ बार खोल कर

देखती हूँ, कुछ गुम तो नहीं हुआ?

सब कुछ तो वैसा ही हैं पर ये

खालीपन का एहसास क्यों है ?


क्यों निगाहें और दिल

कुछ ढूंढ रहे हैं हर पल ?  

मान क्यों भरी है कुछ

खोने के एहसास से ?


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

More hindi poem from Shalini Prakash

मेरी चाह

मेरी चाह

1 min വായിക്കുക

तुम

तुम

1 min വായിക്കുക

पहल

पहल

1 min വായിക്കുക

पतझड़

पतझड़

1 min വായിക്കുക

आस

आस

1 min വായിക്കുക

मन

मन

1 min വായിക്കുക

इजाज़त

इजाज़त

1 min വായിക്കുക

कुछ

कुछ

1 min വായിക്കുക

इंतजार

इंतजार

1 min വായിക്കുക

Similar hindi poem from Abstract