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Shalini Prakash

Abstract

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Shalini Prakash

Abstract

मन

मन

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बीते हुए कल ने बांध रखा है,

बंधन खोलने को आतुर है मन,


नीले आकाश की छतरी के नीचे,

मन की गांठ को पिघलने की इच्छा लिए,


मन के मनघड़ंत किस्सों को,

सच्चाई में बदलने को।


साहित्याला गुण द्या
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