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SANDIP SINGH

Inspirational

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SANDIP SINGH

Inspirational

कुछ तो काला दाल में

कुछ तो काला दाल में

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कुछ तो काला दाल में, सूरत पर है हर्ष।

बात करें वह गर्व में, फिर भी हो उत्कर्ष।।


कुछ तो काला दाल में,मिलता मुझ से रोज।

करता बातें खूब ही, दोनों खाते भोज।।


कुछ तो काला दाल में,आज हुआ बेचैन।

ह्रदय उदासी से भरे, मलिन हुआ है रैन।।


कुछ तो काला दाल में, सभी गए बाजार।

खुशियों में थे वे सभी, पैसे लिए हजार।।


कुछ तो काला दाल में,बैठक में हैं आज।

यूं तो जाते हैं नहीं, रहे छिपाए राज।।


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