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SANDIP SINGH

Inspirational

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SANDIP SINGH

Inspirational

मुक्तक छंद

मुक्तक छंद

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बहर:_2122,2122,2122,212


मिसरा:_क्या सुधा भी हर सकेगी आज मेरी पीर को


 मैं चला हूं अब, सजाने फूल से तसवीर को।

टाल लूंगा श्रम, कड़ा कर नीच सी तक़दीर को।


तुम नगीना हो, खजाने की सजा दी हो मुझे_ 

खत्म कर दोगी, मजे से यार मेरे पीर को।


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