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मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)

Abstract

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मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)

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कुछ ख़्वाहिशें हैं…

कुछ ख़्वाहिशें हैं…

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कुछ ख़्वाहिशें हैं जिन्हें सब से छुपा रखा है

एक आग सी है जिसे बरसों से दबा रखा है !


कोई साथ हो, हमसफ़र बने, तो बात ही क्या

वैसे तो यादों का एक कारवाँ सजा रखा है !


पहले भी कई बार इश्क़ हुआ है दुनिया में

मेरी ही बार क्यों सबने तूफ़ान उठा रखा है !


यह भी कहाँ किसी करिश्मे से कुछ कम है

इस दौर में भी जो हमने ईमान बचा रखा है !


हौसले की मेरे क्या बात करते हो ऐ दोस्त ?

दुश्मनों को ख़ुद ही दे अपना पता रखा है !





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