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Pratham Raj Wadhwa

Abstract

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Pratham Raj Wadhwa

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साक्षात्कार

साक्षात्कार

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सत्य है तभी तो असत्य है;

नाम है तभी तो बदनाम है;

मानव है तभी तो दानव है;

साईं है...

     .... तभी तो कसाई है

परंतु सत्य माने,

जिस दिन भी आत्मा होगी,

उस दिन परमात्मा भी होंगे।


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