कुछ बातें खुद से
कुछ बातें खुद से
व्यक्ति -
जब कभी खुद को अकेला पाया तो तुझे अपने पास पाया,
हर जगह हर मोड़ पर तू साथ खड़ा रहा,
क्या तुझे मुझ से नफ़रत नहीं होती,
क्यों तू हर वक्त मेरे साथ रहता,
परछाई - मैं हर पल तेरे साथ हूं,
तू है तो मैं हूं मेरा अस्तित्व है,
बेशक अंधेरों में साथ नहीं पर पास हूं साथ हूं,
जब तू अकेला खुद को पाता तब साथ हूं,
बेशक लोगों के ताने तू सुनता है,
पर तेरी अच्छाई से वाकिफ हूं मैं,
तुझसे नफरत कैसी मैं तेरा ही तो हिस्सा हूं,
व्यक्ति - क्या सच में मुझमें अच्छाई है,
क्या मैं दिल का सच्चा हूं,
क्या मुझे भी दर्द होता है,
क्या मुझे भी किसी के दुख से फर्क पड़ता है,
परछाई - हां तुझमें अच्छाई है,
तभी तू सच के लिए लडता है,
हां तेरा दिल साफ है,
तभी तू दर्द में रोते इंसान को चुप कराता है,
हां तुझे भी दर्द होता है,
तभी अपनों के दुख में तू भी दुखी होता है,
हां तुझे फर्क पड़ता है,
तभी तूं अंदर ही अंदर घुटता है,
बेशक मैं तुझसे कभी मिला नहीं,
पर तेरे हर कार्य का हिस्सा हूं,
जो तू गलत करेगा उसका भागीदार भी,
क्योंकि तुझसे बनी तेरी परछाई मैं,
जो कोई नहीं देखता वो देख लेता हूं मैं,
मैं वो हूं.. जो दिखता नहीं पर साथ तेरे चलता हूं,
जहां तू वही तो मैं रहता हूं,
जिस प्रकार आईना सच दिखाता है,
मैं सच देख लेता हूं।
