STORYMIRROR

Rajiv Jiya Kumar

Abstract

4  

Rajiv Jiya Kumar

Abstract

कत्ल की तैयारी है

कत्ल की तैयारी है

1 min
220

बन तमाशाबीन होकर मौन

देख रही है दूनिया प्यारी 

कर चुका हूँ आज मैं पूरी

इच्छाओ के कत्ल की तैयारी।।

कठोर वक्त की खाकर ठोकर

मुरझा गई सपनों की फुलवारी

क्या क्या न सहा,कुछ न कहा

सिसकती खङी जिन्दगी बेचारी,

कर चुका हूँ आज मैं पूरी

इच्छाओं के कत्ल की तैयारी।।

आँसू भी कहाँ ढलते जब

रोती बस हर आह बेचारी,

नही पुष्प पा सकते अब तो

सीचतें सब काँटों की क्यारी,

बहुत मन की कह ली अब तक

बनी हर खुशी ईक व्यापारी,

तभी तो कर ली आज मैने पूरी 

इच्छाओं के कत्ल की तैयारी।।

बन तमाशाबीन होकर मौन

देख रही है दुनिया प्यारी।।

            



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract