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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

कस्तूरी नाभि में बसे

कस्तूरी नाभि में बसे

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ज़िन्दगी बेहद खूबसूरत है ,

     पर सबको समझ नहीं आता है।

लोग इश्क तो कर लेते हैं ,

     पर उन्हें निभाना नहीं आता है ।।

       

कस्तूरी जैसी जो गंध है ,

       यह मन के अंदर की सोच है ।

इधर उधर क्या भागना ,

      साधक और साधन की लोच है ।।


खुद मन को जब ढूंढता है कोई ,

      खुशबू सारी फैलाती गंध है ।

कस्तूरी मन में बसा हुआ है ,

      लोग कहीं और किसी पर मुग्ध है ।।


साधक साधन साधना करते हैं ,

      चंदन बंधन मिलकर साध्य हैं ।

हृदय में बसाकर अपने प्रेम को ,

     ये मन मज़बूती से बांधें बाध्य हैं ।।



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