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शालिनी गुप्ता "प्रेमकमल"

Abstract

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शालिनी गुप्ता "प्रेमकमल"

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कशमकश

कशमकश

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अजीब कशमकश है

कि लापता भी हुए

तो कहाँ हुए...

जिंदगी के झुरमुटे में

कभी डूब गये तो

कभी पार हुए..

ये जिंदगी का भी

अजीब फ़लस्फ़ा है कि..

अपने ही घर के आँगन में

आकर हम गुमनाम हुए ..

ये बड़ा ही अजब मामला है कि

अपनो से सजी बज़्म में

कोई अपने ही ना मिले।



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