STORYMIRROR

शालिनी गुप्ता "प्रेमकमल"

Abstract

4  

शालिनी गुप्ता "प्रेमकमल"

Abstract

कशमकश

कशमकश

1 min
404

अजीब कशमकश है

कि लापता भी हुए

तो कहाँ हुए...

जिंदगी के झुरमुटे में

कभी डूब गये तो

कभी पार हुए..

ये जिंदगी का भी

अजीब फ़लस्फ़ा है कि..

अपने ही घर के आँगन में

आकर हम गुमनाम हुए ..

ये बड़ा ही अजब मामला है कि

अपनो से सजी बज़्म में

कोई अपने ही ना मिले।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract