Daizy Lilani
Drama Action Classics
मथुरा जेल, रोहिणी तारा स्थित
आधी रात के अंधेरे में,
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
जन्माष्टमी पूरे देश में,
बड़ी धूमधाम मनाई जाती।
मक्खन स्वाद और गोपियों रास,
मुख्खमंडल बृहमाण
कालिया नाग विजय धारित कृष्णा,
जन्माष्टमी दिवस दुनिया भर में विशेष।
रंगरसिया
कृष्णा
रंगबरसे
आज भी
हर
प्रीत
दर्द से घायल बना हूँ, जख्म आकर मिटाले। दर्द से घायल बना हूँ, जख्म आकर मिटाले।
रविवार को छुट्टी होती थी जब भी भर लाती मैं वहां से जरूरी सामान। रविवार को छुट्टी होती थी जब भी भर लाती मैं वहां से जरूरी सामान।
हर किसी ने जी भर कर ग़ुस्सा, मासूम पे निकाला, हर किसी ने जी भर कर ग़ुस्सा, मासूम पे निकाला,
मुझे अब तू रहने दे महकता ही क्यों खिज़ा का मौसम तू ले आई जिंसदी। मुझे अब तू रहने दे महकता ही क्यों खिज़ा का मौसम तू ले आई जिंसदी।
तुम्हारा इंतज़ार है "मुरली" दिल का चमन महका जाओ। तुम्हारा इंतज़ार है "मुरली" दिल का चमन महका जाओ।
एक वो जो अनमोल मणि देता है और एक वो जो ज़हर देता है। एक वो जो अनमोल मणि देता है और एक वो जो ज़हर देता है।
आज वर्तमान में जिम्मेदारी हम भी बखूबी निभा रहे भाई -बहन से परे, बच्चों के झगड़े सुलझा रहे। ये प... आज वर्तमान में जिम्मेदारी हम भी बखूबी निभा रहे भाई -बहन से परे, बच्चों के झगड़...
चली जा तू भी उसकी तरह मुड़कर जिसने देखा नहीं है चली जा तू भी उसकी तरह मुड़कर जिसने देखा नहीं है
खो गई है मोहब्बत कहीं, दिल में आज ग़म ही ग़म भरे हैं, खो गई है मोहब्बत कहीं, दिल में आज ग़म ही ग़म भरे हैं,
धूप गर्मी या हो बरसात झट से आंचल सर पर तन जाए धूप गर्मी या हो बरसात झट से आंचल सर पर तन जाए
और उस अनुभूति से मेरी गिरती धूमिल होती मनोदशा को नई दिशा मिल गई। और उस अनुभूति से मेरी गिरती धूमिल होती मनोदशा को नई दिशा मिल गई।
जो समझ ले इसको वो अपनो से दूर नहीं होते हैं ।। जो समझ ले इसको वो अपनो से दूर नहीं होते हैं ।।
अब खुद पत्थर सी ढल गई हूं मैं अब लगता है मुझको तेरी परछाई बन गई हूं मैं। अब खुद पत्थर सी ढल गई हूं मैं अब लगता है मुझको तेरी परछाई बन गई हूं मैं।
मदमस्त तुम्हारा यौवन है "मुरली" आकर आलिंगन दे जाओ। मदमस्त तुम्हारा यौवन है "मुरली" आकर आलिंगन दे जाओ।
दर्द दूसरों का सुन-सुन कर थक चूंकि हूँ अपने दर्द सरे-आम करना चाहती हूँ दर्द दूसरों का सुन-सुन कर थक चूंकि हूँ अपने दर्द सरे-आम करना चाहती हूँ
उसने सब कुछ बलिदान किया मन त्याग दिया तन त्याग दिया उसने सब कुछ बलिदान किया मन त्याग दिया तन त्याग दिया
रिश्तों में जो गांठ आए उससे पहले रिश्तों को संभालो रिश्तों में जो गांठ आए उससे पहले रिश्तों को संभालो
रास लीलामें नाच नचाकर फ़िर क्युं छूप जाता है ?... रास लीलामें नाच नचाकर फ़िर क्युं छूप जाता है ?...
न कुछ कह पाते ना कभी बता पाते चाहते भी तो आखिर किसे कहते हैं न कुछ कह पाते ना कभी बता पाते चाहते भी तो आखिर किसे कहते हैं
मैं उनको अपना दर्द बताऊंगी कैसे ? और उनपर अपना हक जताऊंगी कैसे ? मैं उनको अपना दर्द बताऊंगी कैसे ? और उनपर अपना हक जताऊंगी कैसे ?