कृष्ण तुम तो सबके मन को भाये
कृष्ण तुम तो सबके मन को भाये
कृष्ण तुम तो सबके मन को भाये।
तुमने हैं ना जाने कितने नाम पाये।
कान्हा, कन्हैया, मुरलीधर कहाये।
गोपाल, माधव, मनोहर कहलाये।
जब श्याम रंग लेकर जन्म पाये।
तब से तुम सबके श्याम कहलाये।
गायों से तुम बहुत लाड़ प्यार पाये।
ऐसे ही तुम सबके गोपाल कहलाये।
जब मटकी से माखन चुराकर खाये।
तब तुम सबके माखनचोर कहलाये।
जब तुम सबके मन को मोह लाये।
तब तुम सबके प्यारे मोहन कहलाये।
सबको मुरली बजाकर रिझाये।
तब तो तुम मुरलीधर कहलाये।
जब से तुम पर्वत उंगली पर उठाये।
तब से तुम सबके गिरिधर कहलाये।
जब से तुम अपनी उंगली से चक्र चलाये।
तब तुम चक्रधारी और चक्रवर्ती कहलाये।
तुमने द्वारका नगरी बनाई और राज चलाये।
तुम सबके प्रिय राजा द्वारकाधीश कहलाये।
कृष्ण तुम तो सबके मन को भाये।
तुमने हैं ना जाने कितने नाम पाये।
