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Anjali Pundir

Inspirational

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Anjali Pundir

Inspirational

कर्म-दीप

कर्म-दीप

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घना निविड़ अंधकार...

भयंकर तूफान...

चहुँ ओर घटाघोप...

हाथ को हाथ न था सूझता...

कहाँ जाएँ...?

कोई पथ नहीं...

आशा की .....

नन्ही किरण तक नहीं....

चहुँ दिश हा हा कार.....

हा ! प्रचंड तूफान.....

सहसा.....

उम्मीद की

धीमी आहट सा....

दू.......र

दूर.....टिमटिमाता वो नन्हा दीप

विकराल तूफान में

मानो नवजीवन का

संदेश था........

तूफान धारण किये

भयावह रूप

कर्म-दीप बुझाने हेतु

कटिबद्ध सा

चला आ रहा था......

बढ़ा आ रहा था......

और.......उधर..........

फल की इच्छा से

अनभिज्ञ दीप

कर्म के ज्वलंत रूप सा

मानव-पथ आलोकित

कर रहा था......

तूफान अपनी कामना

दिल ही में लिए

हो गया विलीन

उसी अंधकार में

बिखेर रहा था नन्हा दीप

अभी भी......

अपने सुनहले कर्म की

निर्मल रश्मियाँ..............


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