STORYMIRROR

Adv. Anjali Pandey

Abstract

2  

Adv. Anjali Pandey

Abstract

कर गलत उतना ही

कर गलत उतना ही

1 min
43

कर गलत उतना ही बर्दाश्त जितना खुद कर सके...

और जो घोला है हलाहल हर दिल खुद ने...

तो करके नित आराधना उस अघोरी शिव की..

हर दिन अब पाखण्ड क्यों है करे...?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract