STORYMIRROR

Adv. Anjali Pandey

Abstract Romance

4  

Adv. Anjali Pandey

Abstract Romance

जब से तन्हा तुम छोड़ गए हो

जब से तन्हा तुम छोड़ गए हो

1 min
306

ढूँढा है मैनें तुम्हें हर गली,

गलियारे और उस बहते गंगा के पानी में...


किये थे जिक्र जिनके तुमने

मुझसे कभी तुम्हारी बातों में...


और जब से तन्हा तुम छोड़ गए हो

मुझको इस दुनिया में...


तो सुनो बिन तुम्हारे अब रहती हूँ

मैं तन्हा हर पल अंधियारे में...!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract